बस किस्मत, वक़्त और खुदा ने मंजूरी ना दी – Gam Bhari Shayari
किरदार मेरा भी मजबूत था और किरदार उसका भी रोबदार था, बस किस्मत, वक़्त और खुदा ने मंजूरी ना दी !! निकला न करो रमज़ान के महीने में सफेद कपड़े पहन कर, कोई तोड़ न दे रोज़े तुम्हे चाँद समझकर !! तुम भी कभी “जी” कहती ये हसरत हसरत ही रही तुमने देखा ही नहीं …
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